Principal of Physical Education Notes


 Principal of Physical Education Notes In Hindi 


सीखने के तीन मुख्य नियम


तत्परता का नियम Readiness law- → इस नियम के अनुसार जब हम कायों को सीखने के लिए हम तैयार रहते है तो उन कायों को हम सीख लेते है परन्तु जब हम कार्यों को सीखने के लिए तैयार नहीं रहते है तब वह कार्य कर हम नहीं सीख पाते।


अभ्यास का नियम 


इस नियम के अनुसार जब हम किसी कायों को बार-बार करेंगे- तब वह कायों हम जल्द ही सीख लेते है क्योरि हमने उसका अभ्यास किया है


> अभ्यास के माध्यम से सीखना आसान हो जाता है


प्रभाव का नियम


د इस नियम के अनुसार जब हम किसी कार्य को खुशी व कुख से करते है तो उसे सीखना आसान हो जाता है यह नियम सतोष का नियम भी कहलाता है


खुशी मिलने पर कार्य को बार-बार करके सिखा जा सकता है 


दुख मिलने पर हुम उस कार्य को तुस्त करना घेड देते हैं


उददेश्य का नियम


किसी व्यक्ति का उस कार्य को करने का उदय जितना प्रछत होता है लिए उपयुक्त होते है अर्थात आसानी से उस कार्य को समनन लेते है


मनोवृति का नियम


यदि हम किसी कार्य को करने के मानसिक रूप से तैयार नहीं है तो उसे सीखने से भी अजित समय लगेगा या हम उस क्रिया को न ही सीख पाये


बहु अधिगम के नियम


• हम एक समय में केवल ही बात नही सीख पाते है हम अनेको ज्ञान को अर्जित करते ह


सीखने को प्रभावित करने वाले कारक 


सीखने को प्रभावित करने वाले कारक अनेक प्रकार के है जो निम्न है 

बुध्दि

सीखने की किया को मारा रूप से प्रभावित हमारी बुध्दि करती है जिसकी बुध्दि श्रीव व सही होगी उसकी सीखने की क्षमता भी अधिक होगी एक नंद बुदि बालक या व्यक्ति को सीखने की क्षमता भी कम होती है


Health and Age 


एक बालक या व्यक्ति की सीखने की क्षमता अधिक प्रभावशाली होती है सीखने का मुख्य प्रभाव हमारी उम्र पर भी पड़ता है कम उम्र में हम सीखने क क्षमता को अधिक प्रभावित कर सकते हैं


सीखने की तत्परता


अर्थात यदि हम सीखने को तैयार है तव अधिक प्रभावशाली तरिके से उस कार्य को सीख लेते है   


वातावरण


सीखने का मुष्य समबंध हमारे आस-पास के वातावरण पर भी पड़ता है - विद्यालय , कक्षा, घर, समुदाय, शाते व स्नेहपूर्ण होना चाहिए क्योकि इनका प्रभात हमारे सीखने की प्रक्रिया पर पडता है


सीखने की विधि


हम सीखने की किस प्रभावी विधि का प्रयोग कर रहे है इसपर हमारे सीखने की क्षमता निर्भर करती है


प्रत्येक विद्यााली या व्यक्ति को सीखने की क्षमता अलग-अलग प्रकारो पर निर्भर करती है- बार-बार अभ्यास, समझकर सीखना या देखकर सीखना।


व्यक्तित्व (Personality)


व्यक्तित्व जीने का


व्यक्तित्व व्यक्ति द्वारा अपने लिए या इसरो के लिए किए जाने वाले व्यवहार 


किसी भी व्यक्ति के व्यक्ति को दो पक्षो के आधार पर जज किया जाता है


☆ व्यक्तित्व अर्थात एक व्यक्ति द्वारा समाज द्वारा उसके दिया जाने गुणो, व्यवहार, आचरण विचारी , सुझाव के आधार पर दिया जाने वाला अपूर्व समायोजन होता है


समाज लोगो ठारा हमारे कायौ या आचरण अनुसार जो हमारे विषय मे विचार स्पष्ट किया जाता है या हमारे बारे मे एक हमारे एक सोच प्रस्तुत कि जाती है


शारीरिक

मानसिक

सामाजिक


Individual Differences 

व्यक्तिगत भिन्नता


व्यक्तिगत भिन्नता से हमारा अभिप्राय प्रत्येक व्यक्ति मे पाये जाने वाले शारीरिक मानसिक सवेगात्मक साक्कृतिक, सामाजिक अतर होना


मनोविज्ञान के क्षेत्र मे व्यक्तिगत भिन्नता का पता लगाया गया। जिसके अनुसार कोई भी दो बच्चे एक समान नही हो सकते है उनमे कुछ न पाई जाती है कुछ भिन्नता


व्यक्तिगत भिन्नता मे का एक व्यक्ति के व्यक्तित्व कोई भी पहलू जिसे हम सकते है सम्मिलित होता है


शरीर के आकारो मे भिन्नता शारीरिक स्वरूपो मे भिन्नता शारीरिक कायों में भिन्नता

बुष्टि में भिन्नता

तर्क शक्ति में भिन्नता गुणो मे भिन्नता

बान मे भिन्नता

रचियो में भिन्नता

विचारो मे भिन्नता

सीखने मे भिन्नश

चरित्र में भिन्नत

व्यक्तित्व में भिन्नत

- वशानुक्रम , बातावरण, जाति, प्रजाति देश आयु, बुध्दि

→ परिक्षण विधियों के माध्यम से जानने का प्रयास


Leadership (नेतृत्व)


नेतृत्व वह व्यवाहरिक प्रकिया है जिसकी सहायता से व्यक्ति या समूह को किसी निधाििरत लक्ष्य उद्वेग्य को प्राप्त करने के लिए प्रेवित व मही मागदर्शन प्राप्त किया जाता है 


प्रबलता, साहस • बुध्दिमता तथा विनोद जैसी कुछ महत्वपूर्ण विशेषता जो व्यक्ति को लिए एक एक सामान्य कुशल नेता बनाने के आवश्यक होती है इन्हे जन्मजात या तो बहुत अधिक मेहनत के पश्चात गुण प्राप्त होते है 


मनुष्य में नेतृत्व करने के गुण जन्म से ही विद्यमान होते है


शारीरिक शिक्षा मे नेतृत्व के लिए व्यक्तिगत गुण, जैसे- प्रेरणा, शक्ति बुध्दिमता , कल्पना शक्ति व अनेको प्रकार की विशेषताए भी आवश्यक होती है 


शारीरिक शिक्षा व खेलकूद के क्षेत्र में नेतृत्व


शारीरिक शिक्षा و व खेलकूद के क्षेत्र में नेतृत्व के कुशल प्रदर्शन व बेहतर विद्याची शिक्षक , प्रतियोगिता में खिलाडियो के कुशल प्रदर्शन के लिए आवश्यकता होती है.


शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र मे नेतृत्व का अपना अलग ही महत्व माना जाता है क्योकि किसी भी टिम दल के नेता का टीम का नेतृत्व करना, कुशलतापूर्व मार्गपरान करना।


किसी विशेष समय मे विशेष परिस्निति उद्देश्यो, लक्ष्यो लोगो को सही मार्गप्रान पदान करना ही नेतृत्व कहलाता है 


खेल मनोविज्ञान ( Sports Psychology)


भाज मानव के जीवन से सम्बंधित सभी क्षेत्रो मे मनोविज्ञान की आवश्यकता पड़ती है सभी प्रकार व्यवहार सम्बंधी समस्याओं को सुलझाने के होती लिए मनोविज्ञान की आवश्यकता


आज के इस समय मे - कुट की कियाओ का प्रयोग केवल मनोरजन सीमित नहीं रहा है बल्कि खेल कियाओ मे मान सम्मान जीविका कमाने हेतु भी प्रयोग करते है


खेल कियाओ मे खिलाडी शारीरिक न केवल से बल्कि मानसिक कियाओ स्वकार होकर ही को सही सभी कौशल खेल रूप व क्रियाओ प्रकार से करने के लिए


वृद्धि एवं विकास ( Growth and Development)


← मनुष्य में वृद्धि एवं विकास करने की प्रवृन्ति पाई जाती है मनुष्य में विकास उसके जीवन में निरन्तर चलने विकार प्रक्रिया होती है वही व्यक्ति की वृष्टि का को सभी पहला सूचक उसको शारीरिक संरचना माना जाता है शारीरिक वृद्धि अन्य प्रकार की वृदिदये। का आधार होता है


व्यक्ति के विकास में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान होता है शिक्षित व्यक्ति में विशेष प्रकार से बौध्दिक समता का विकास होता है वह विभिन्न प्रकार की बुराइयो सदा दूर रहने का प्रयास करता है समाज का भी व्यक्ति के विकास हेतु महत्वपूर्ण योगदान होता है


विकास ( Development) 

व्यक्ति के जीवन मे विकास की प्रक्रिया का अपना विशेष महत्व होता है। विकास व्यक्ति के जीवन की एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसका संचालन वह जीवन से लेकर मृत्यु तक रहता है सर्वप्रबम व्यक्ति मे शारीरिक विकास होता है जो जन्म से ही शारीरिक विकास की ओर अग्रसर होती है विकास का मुख्य आधार, समाज परिवार शिक्षक

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